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गोपाल जी ने तीन बार बस्तर में पूजा-अनुष्ठान करवाये हैं । मुझे आज क्या मिला है यह लिखकर नहीं देखकर समझा जा सकता है । जगदलपुर में मै. सजावट का आज का ये रूप उस पूजा-पाठ का ही परिणाम है । उनकी किताब के एक छोटे से प्रयोग ने दिन-ब-दिन हमारे उन्नति के रास्ते खोल दिए थे । उस चमत्कारी प्रभाव से प्रेरित होकर ही मैं उनसे मिला था । गोपाल जी का व्यक्तित्व मैग्नेटिक प्रभाव वाला है और उनके क्रम, उपक्रम, लेखन आदि सब विलक्षण हैं और सबसे अलग ।
*सत्यपाल मग्गू, जगदलपुर, बस्तर
Dear sir, As advised, I daily recite Bajrag Baan, finally I got a good job. This is all because of Bajrang Baan. I am very thankful to you and to your website which is helping all people.
*Meenu Maheswary, Ahmedabad
Eight years back Shri Gopal Raju Jee had analyzed and given me a ring of Emerald+Gilson. This combination had given me very good results during past eight years. Again I am requesting to kindly give me suitable ring.
*Subash Chand, Bulandshahr (UP
I have been selected in IBM. I was struggling for my career settlement after completing MCA but not getting any job. After meeting Sh Gopal Raju sir my life now after 6 years is running smoothly.His puja and stone combination gave be positive results.
*Sanjeev, Saharanpur
श्री राजू जी ने मुझको १९८३ में पुखराज और मूंगे की एक रिंग दी थी । उससे मुझको आशा से भी अधिक लाभ मिल रहा है । रत्न गणना की उनकी अपनी विधियां वास्तव में प्रशंसा के योग्य हैं ।
*अनिल कुमार त्यागी, जे. ई., पौड़ी
२५ वर्षों से भी अधिक से मैं गोपाल राजू जी जुड़ा हूँ । मुंबई प्रवास में उनकी पूजा और अनुष्ठान से मुझे आशातीत लाभ हो रहा है । मेरे साथ हरिद्वार में उनके द्वारा किये गए अनुष्ठान ने तो मुझे बहुत ही उन्नति दी । आज मुंबई जैसे महानगर में मेरे दो क्लिनिक और अपना मकान है । आज भी मैं उनसे जुड़ा हुआ हूँ और नियमित उनकी सलाह पर चलता हूँ । बहुत आस्था है मुझे उनपर और उनकी कार्यशैली पर ।
*डॉ. चौधरी, मुंबई
I am impressed with Sh Gopal Raju ji for his analysis regarding change in the name of my son. I am feeling changes in him.
*M/s Ganpati Traders, Arani (TN)



उचित रूप से चुना गया रत्न दूर करता है मूल नक्षत्र दोष

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उचित  रत्न दूर करता है मूल नक्षत्र दोष


    राशि और नक्षत्र दोनों जब एक स्थान पर समाप्त होते हैं तब यह स्थित गण्ड नक्षत्र कहलाती है और इस समापन स्थिति से ही नवीन राशि और नक्षत्र के प्रारम्भ होने के कारण ही यह नक्षत्र मूल संज्ञक नक्षत्र कहलाते हैं।
    बच्चे के जन्म काल के समय सत्ताइस नक्षत्रों में से यदि रेवती, अश्विनी, श्लेषा, मघा, ज्येष्ठा अथवा मूल नक्षत्र में से कोई एक नक्षत्र हो तो सामान्य भाषा में वह दिया जाता है कि बच्चा मूलों में जन्मा है। अधिकांशतः लोगों में यह भ्रम भी उत्पन्न कर दिया जाता है कि मूल नक्षत्र में जन्मा हुआ बच्चे पर बहुत भारी रहेगा अथवा माता, पिता, परिजनों आदि के लिए दुर्भाग्य का कारण बनेगा अथवा अरिष्टकारी सिद्ध होगा।
    राशि और नक्षत्र के एक स्थल पर उदगम और समागम के आधार पर नक्षत्रों की इस प्रकार कुल 6 स्थितियां बनती हैं अर्थात् तीन नक्षत्र गण्ड और तीन मूल संज्ञक। कर्क राशि तथा आश्लेषा नक्षत्र साथ-साथ समाप्त होते हैं तब यहॉ से मघा राशि का समापन और सिंह राशि का उदय होता है। इसी लिए इस संयोग को अश्लेषा गण संज्ञक और मघा मूल संज्ञक नक्षत्र कहते हैं।
    वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र एक साथ समाप्त होते हैं। यहॉ से ही मूल और धनु राशि का प्रारंभ होता है। इसलिए इस स्थिति को ज्येष्ठा गण्ड और मूलमूल संज्ञक नक्षत्र कहते हैं। मीन राशि और रेवती नक्षत्र एक साथ समाप्त होते हैं। यहॉ से मेष राशि व अश्विनि नक्षत्र प्ररांभ होते हैं। इसलिए इस स्थिति को रेवती गण्ड और अश्विनि मूल नक्षत्र कहते हैं।
उक्त तीन गण्ड नक्षत्र अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का स्वामी ग्रह बुध और मघा, मूल तथा अश्विनि तीन मूल नक्षत्रों का स्वामी केतु है। जन्म काल से नवें अथवा सत्ताइसवें दिन जब इन नक्षत्रों की पुनः आवृति होती है तब मूल और गण्ड नक्षत्रों के निमित्त शांति पाठों का विधान प्रायः चलन में है।
ज्योतिष के महाग्रंथों शतपथ ब्राह्मण और तैत्तिरीय ब्राह्मण में मूल नक्षत्रों के विषय में तथा इनके वेदोक्त मंत्रों द्वारा उपचार के विषय में विस्तार से वर्णन मिलता है। यदि जातक महाग्रंथों को ध्यान से टटोलें तो वहॉ यह भी स्पष्ट मिलता है उक्त छः मूल नक्षत्र सदैव अनिष्ट कारी नहीं होते। इनका अनेक स्थितियों में स्वतः ही अरिष्ट का परिहार हो जाता है। यह बात भी अवश्य ध्यान में रखें कि मूल नक्षत्र हर दशा में अरिष्ट कारक नहीं सिद्ध होते। इसलिए मूल नक्षत्र निर्णय से पूर्व हर प्रकार से यह सुनिश्चत अवश्य कर लेने में बौद्धिकता है कि वास्तव में मूल नक्षत्र अरिष्टकारी है अथवा नहीं

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